नहीं रहे जानकी वल्लभ शास्त्री के दामाद व प्रसिद्ध नाटक ‘लोहा सिंह’ के ‘फाटक बाबा’ प्रभात चंद्र

महाकवि जानकी वल्लभ शास्त्री के दामाद व नाटककार प्रभात चंद्र मिश्र का चतुर्भुज स्थान रोड स्थित आवास पर सोमवार को निधन हो गया. वे 90 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे. वे अपने पीछे पत्नी शैलबाला सहित दो पुत्रियों का परिवार छोड़ गये हैं. सोमवार की शाम में इनका अंतिम संस्कार किया गया. प्रभात चंद्र मिश्र करीब पांच दशक तक आकाशवाणी के नाटक विभाग से जुड़े हुए थे. आकाशवाणी से प्रसारित लोहा सिंह नाटक में उन्होंने फाटक बाबा की भूमिका से अपनी पहचान बनायी थी. यह नाटक इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग इन्हें फाटक बाबा कह कर बुलाने लगे. प्रभात चंद्र ने विलियम शेक्सपीयर के जूलियस सीजर का हिंदी काव्यानुवाद कर 1996 में पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया था. इस पुस्तक के आधार पर कई नाट्य दलों ने मंचन किया. प्रभात मिश्र ने कई फिल्मों में भी अभिनय किया था. आचार्य चंद्रकिशोर पराशर ने इनके निधन को साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. डॉ संजय पंकज ने कहा कि जानकी वल्लभ शास्त्री के निधन के बाद प्रभात चंद्र मिश्र अभिभावक की तरह थे. प्रभात चंद्र मिश्र से गहरे जुड़े रहे डॉ विजय शंकर मिश्र ने कहा कि यह लेखन कर्म से जुड़े लोगों के लिए यह दुख की घड़ी है. इनके अलावा डॉ इंदु सिन्हा, डॉ पूनम सिंह, डॉ पंकज कर्ण सहित कई लोगों ने श्रद्धांजलि दी.

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