बौद्ध धर्म खुद की खोज

बौद्ध धर्म खुद की खोज है जो बाहरी दिखावों से दूर अपने चित्त को शांत कर खुद में परमात्मा का दर्शन करवाता है। एक जगह बैठकर ध्यान लगाना तथा मौैन हो जाना बौद्ध धर्म की पहचान है। बौद्ध धर्म कहता है कि आप खुद को जीतना जानोगे ईश्वर को उतना पाओगे। भगवान बुद्ध जो बौद्ध धर्म के संस्थापक थे इनके चेहरे पर भी ध्यान अवस्था में मुस्कुराता चेहरा इस धर्म की शांती और वैभव का व्याख्यान करता है।
बुद्ध नें इच्छाओं के दमन अती से बचने के लिए आध्यात्मिक मार्ग पर चलने को कहा। सम्यक ज्ञान, दर्शन, समाधि, ध्यान, संकल्प, स्मृती तथा कर्म में बंधने को कहा है।
तत्कालिन ब्राह्मण धर्म आडंबर से धिरा हुआ था। पुरोहितों का बर्चस्व और परमात्मा पर एकाधिकार का उनका कथन समान जन मानस के लिए कहीं न कहीं समाजिक विद्रोह का सूचक बनता चला गया। बौद्ध धर्म ने मूर्ती पूजा का विरोध किया और विडम्बना ये देखिए कि प्रथम मूर्ती बुद्ध की बनाई गई। शुरूआत के तीनो बौद्ध सम्मेलन पाली भाषा में होना और अन्त का सम्मेलन संस्कृत में होना ये दिखाता है कि ब्राह्मण धर्म ने बौद्ध धर्म को अपने मंे मिला लिया था,लेकिन बौद्ध धम अपने अस्तित्व को आज भी बचाए हुए है।

 

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