एक विचार जो बना जन आंदोलन ….आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज

पटना :”हमें भी पढ़ाओ” एक ऐसा सामाजिक आंदोलन है जो दो भागों में बंटे समाज को जोड़ता है | एक उच्च वर्ग जो बड़े-बड़े महलों में रहते हैं और एक ऐसा वर्ग है जो गांवों एवं स्लम की झुग्गी- झोपड़ी में पशुवत जीवन व्यतीत करता है | अगर समाज को प्रगति करनी है तो इस खाई को भरना होगा | यह विचार “हमें भी पढ़ाओ” नि:शुल्क शिक्षा आंदोलन के संस्थापक “आचार्य श्री सुदर्शन जी महाराज” ने आज बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सभागार में एजुकेशनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट संस्थान द्वारा आयोजित एक सेमिनार में व्यक्त किया है |

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आचार्य श्री ने कहा कि जब तक समाज ऊंच-नीच में बटा रहेगा तब तक समतामूलक समाज की संभावना नहीं है | आज गली, कूची में बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर लाखों बच्चे झूठे पत्ते बटोरते दिख रहे हैं | विभिन्न प्रकार की नाशाओं के आदी हो रहे हैं | अगर इन बच्चों को आज सहेजा नहीं गया ,इनके हाथों में कलम और औजार नहीं दिए गए तो वे समाज की मुख्यधारा से कटकर समाज के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं | इसलिए मैंने इन गरीब बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा आंदोलन प्रारंभ किया है |

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आज लगभग पचास हजार से ऊपर बच्चों को पिछले 20 वर्षों में हम लोगों ने प्रशिक्षित किया है | आज भी पटना के विभिन्न गली, मोहल्लों में “हमें भी पढ़ाओ” केंद्र चल रहे हैं | जहां के बच्चों को नि:शुल्क किताब, पेन, अल्पाहार इत्यादि हम दे रहे हैं | मैं समाज के लोगों से अनुरोध करता हूँ कि इस आंदोलन को कारगर बनाने में हमारी संस्था को मदद करें |. इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल श्री गंगा प्रसाद जी एवं श्री शिवचंद्र राम , पूर्व मंत्री, ने आचार्य श्री के किए गए कार्यों की काफी प्रशंसा की इस अवसर पर श्री विनोद शर्मा , श्री राकेश कुमार सिन्हा, श्री ध्रुव जी,राणा जी, प्रो. के. सी. सिंहा ने आचार्य श्री के कार्यों को अपने स्तर पर समर्थन देने का वादा किया |

 

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