भगवान धन्वंतरि जी का प्रकट दिवस शुभ और मंगलमय हो

भगवान धन्वंतरि जी का प्रकट दिवस शुभ और मंगलमय हो

धन्वंतरि लगभग 7 हजार ईसापूर्व के बीच हुए थे। वे काशी के राजा महाराज धन्व के पुत्र थे। उन्होंने शल्य शास्त्र पर महत्वपूर्ण गवेषणाएं की थीं। उनके प्रपौत्र दिवोदास ने उन्हें परिमार्जित कर सुश्रुत आदि शिष्यों को उपदेश दिए। दिवोदास के काल में ही दशराज्ञ का युद्ध हुआ था। धन्वंतरि के जीवन का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग अमृत का है। उनके जीवन के साथ अमृत का स्वर्ण कलश जुड़ा है। अमृत निर्माण करने का प्रयोग…

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धनत्रयोदशी (धनतेरस )व्रत 2018

धनत्रयोदशी (धनतेरस )व्रत 2018

धनत्रयोदशी (धनतेरस ) एवं धनवंतरि जयंती 5 नवंबर सोमवार को होगा। समुद्र मंथन मे जिस कलश के साथ भगवती लक्ष्मी का अवतरण हुआ था उसी के प्रतिक स्वरूप ऐश्वर्य वृद्धि के लिए बर्तन इत्यादि सोना चांदी खरीदने की परंपरा चल पड़ी । नरक चतुर्दशी एवं हनुमत जयंती 6 नवंबर मंगलवार को मनाया जाएगा ।इस बार मंगलवार की हनुमत जयंती अत्यंत पुण्यदायी होगी । क्योंकि हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी…

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महायज्ञ की भभ्य तैयारी लाखों श्रद्धालुओं की आने की शम्भावना

महायज्ञ की भभ्य तैयारी लाखों श्रद्धालुओं की आने की शम्भावना

पटना। मोकामा नगर छेत्र में 15 नवम्बर को मोकामाघाट लखनचन्द ठाकुरवाड़ी के पास श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ की तैयारी पूरी हो चुकी हैं मेले में दूर दूर से आये श्रद्धालुओं की रहने की भी व्यबस्था भी की गई हैं साफ सफाई का पूरा ध्यान दिया गया हैं इस वावत पुलिस प्रशाशन को भी इसकी सूचना दे दी गई हैं अत्यधिक भीड़ को नियंत्रण करने के लिए पूरे सदस्य एवं ग्रामवासी को भी एक्टिव किया गया हैं…

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करवा चौथ आज

करवा चौथ आज

सुहागिन महिलाओं के सभी व्रतों में बेहद खास है करवा चौथ इस दिन महिलाएं दिन भर भूखी-प्‍यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी मनवांछित वर के लिए या होने वाले पति की खातिर निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन पूरे विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है. फिर रात के समय चंद्रमा को अर्घ्‍य देने के…

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शरद पूर्णिमा व्रत

शरद पूर्णिमा व्रत

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। पूरे वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं का होता है और इससे निकलने वाली किरणें अमृत समान मानी जाती है। उत्तर और मध्य भारत में शरद पूर्णिमा की रात्रि को दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणें खीर में पड़ने से यह कई गुना गुणकारी और लाभकारी हो जाती है। शरद…

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आज दशमी को श्री शुभ संवत 2075 “शारदीय नवरात्र” ईसवी सन 2018 19 अक्टूबर को पुर्ण हुआ।

आज दशमी को श्री शुभ संवत 2075 “शारदीय नवरात्र” ईसवी सन 2018 19 अक्टूबर को पुर्ण हुआ।

?न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थं न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् | न जानामि भक्तिं व्रतं वापि मात गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ? भावार्थ :- न मैं पुण्य जानता हूँ न तीर्थ, न मुक्ति का पता है न लयका । हे मातः ! भक्ति और व्रत भी मुझे ज्ञात नहीं है , हे भवानी ! अब केवल तुम्हीं मेरी गति हो, तुम्हीं मेरी गति हो । एक स्त्री शक्ति के पूरे जीवनचक्र का…

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24 अक्टूबर बुध को अमृत पूर्णिमा

24 अक्टूबर बुध को अमृत पूर्णिमा

5 नवम्बर को धनतेरस 6 नवम्बर को नरक चतुर्दशी 7 नवम्बर को दीपावली 9 नवम्बर को भैया दूज व् चित्रगुप्त पूजा 11 नवम्बर रविवार को नहायखाय 12 को खरना 13 को पहली अर्घ्य 14 को पारण 19 को देवोत्थान प्रबोधिनी 22 को (12.35दिन के बाद) व्रताय पूर्णिमा 23 को (दिन 11.46 तक) स्नान दान की पूर्णिमा। विशिष्ट टिप्पणी: ऐसी मान्यता है कि कार्तिक माह में देवोत्थान के दिन से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य (खासकर…

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श्री दुर्गासप्तशती पाठ करने की विधि

श्री दुर्गासप्तशती पाठ करने की विधि

सप्तश्लोकी दुर्गा दुर्गाष्टोत्तरशात्नामस्त्रोतम दुर्गाद्वादशविंशतनाम माला देवी कवच अर्गलास्त्रोत कीलक्स्त्रोत रात्रिसूक्त श्री देव्यर्थवशीर्षम नवार्ण जाप न्यासविधि सहित अध्याय का पाठ नवार्ण जाप देवीसूक्तं सिद्धि कुंजिका स्त्रोतम देव्या अपराध क्षमापन स्त्रोत क्षमा प्रार्थना आरती अध्याय की सुची (सावर्ण) पहला दिन 1 दूसरा दिन 2,3,4 तीसरा दिन 5 चौथा दिन 6,7 पांचवां दिन 8,9 छठा दिन 10,11 सातवां दिन 12 आठवाँ दिन 13 नवमा दिन 3 रहष्य upendra pandey  

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श्री दुर्गा चालीसा

श्री दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥ शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटी बिकराला ॥ रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ॥ तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ अन्नपूर्णा तुम जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥ प्रलयकाल सब नाशनहारी । तुम गौरी शिवशंकर…

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