वैदिक उपदेश

वैदिक उपदेश

आइए आज के वैदिकोपदेशशृंखला में हम कर्म और कर्मफल विषय पर कुछ चिन्तन करें ।कर्मों का फल कब, कैसा, कितना मिलता है, यह जिज्ञासा सभी धार्मिक व्यक्तियों के मन में होती है। कर्मफल देने का कार्य मुख्य रूप से ईश्वर द्वारा संचालित और नियन्त्रित है।वही इसके पूरे विधान को जानता है। मनुष्य इस विधान को कम अंशों में और मोटे तौर पर ही जान पाया है क्योंकि उसका सामर्थ्य ही इतना है। ऋषियों ने अपने…

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सिर्फ गया में हीं नहीं देश के इन जगहों पर भी पितरों का किया जाता है पिंडदान

सिर्फ गया में हीं नहीं देश के इन जगहों पर भी पितरों का किया जाता है पिंडदान

वैसे तो बिहार के शहर गया में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का पिंडदान करने का सबसे उपयुक्‍त स्‍थान माना गया है। भारतीय मान्‍यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म करना अत्‍यंत पवित्र कर्म है। पितृपक्ष में मृत माता-पिता का उनकी संतान द्वारा श्राद्ध किया जाता है, परंतु गया में श्राद्ध का विशेष महत्व है। वैसे तो श्राद्ध शास्त्रीय समय निश्चित है, परंतु ‘गया सर्वकालेषु पिण्डं दधाद्विपक्षणं’ कहकर वहां हमेशा पिंडदान करने की अनुमति दी गई है।…

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अगर आपने घर में रखा है गंगाजल तो भूलकर भी न करें यह काम

अगर आपने घर में रखा है गंगाजल तो भूलकर भी न करें यह काम

हिंदू धर्म में गंगा नदी को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए भक्‍त पवित्र गंगाजल को अपने घर में रखते हैं। अनेक धार्मिक अनुष्‍ठानों में भी इसका प्रयोग होता है।अगर आपने भी अपने घर में रखा है गंगाजल तो इन बातों को अवश्‍य ध्यान में रखें कि जिस कमरे में आप गंगाजल रखें उस कमरे में भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।ऐसा करने से गृहदोष लगता है। गंगाजल को कभी भी…

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जानिए बंदर वाले मंदिर ओर इसकी मान्यता के बारे में

जानिए बंदर वाले मंदिर ओर इसकी मान्यता के बारे में

जयपुर भारत के सबसे सुंदर शहरों में से एक है। पिंक सिटी के नाम से जाना जाने वाला यह शहर अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि यहां के मंदिरों के लिए भी मशहूर है। धर्म अध्यात्म के अनुसार यहां का प्रसिद्ध मंदिर गलताजी मंदिर और कुण्ड भी धार्मिक मान्यताओं से भरा है।जयपुर से लगभग 10 कि.मी. दूरी पर अरावली पहाड़ियों में गलता नाम का मंदिर और कुंड है। यह जगह सात कुण्डों और अनेक…

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जानिए इस मंदिर के बारे में अक्षय तृतिया के दिन खुलता है पट

जानिए इस मंदिर के बारे में अक्षय तृतिया के दिन खुलता है पट

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हैं एक ऐसा मंदिर जो अक्षय तृतीया के दिन खुलता है. यह मंदिर दीवाली के बाद बंद कर दिया जाता है.यह मंदिर काफी प्राचीन है. इसलिए प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त हो गया था. इसलिए मंदिर का पुर्ननिर्माण 19वीं शताब्दी में किया गया था.यह मंदिर देश की दूसरी सबसे पवित्र नदी को समर्पित है. जहां काले संगमरमर से बनी मां यमुना की प्रतिमा है. यह प्रतिमा काफी प्राचीन है. मंदिर यमुना…

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झारखंडः शुरू हो गयी हैं तैयारियां श्रावणी मेले की

झारखंडः शुरू हो गयी हैं तैयारियां श्रावणी मेले की

रांची : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गयी है. इस कड़ी में गुरुवार को मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने विभिन्न विभागों के सचिवों और डीजीपी सहित अन्य अधिकारियों के साथ तैयारी को लेकर समीक्षा की. इस संबंध में आइजी अभियान सह प्रवक्ता आशीष बत्रा ने बताया कि पिछले श्रावणी मेला की तरह इस बार भी उसी अनुपात में 10 हजार अतिरिक्त फोर्स की तैनाती मेला…

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