कोरोना विशेष

नमस्कार मित्रो,

यह संदेश आप सब के लिए है जो इस महामारी के दौर में चिंतित है। कोरोना समस्या ही इतनी बड़ी बन चुकी है कि इसका प्रभाव हर एक क्षेत्र पर पड़ा है, और इस कदर पड़ा है कि समस्त प्रकार के संचालन 90 से 100 प्रतिशत तक ठप्प हो चुके है। और इन समस्याओं से कब निकल पाएंगे ये कहना भी मुश्किल है।

मैं बिहार से हूं तो फिलहाल मैं सिर्फ बिहार की बात करूंगा। बिहार वैसे ही विगत कई वर्षों से अधिकांश मानकों पे देश का सबसे पिछड़ा राज्य है, और कुछ मानकों पे पिछड़े राज्यो में से एक है। चाहे वो प्रति व्यक्ति आय हो, या फिर, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, इत्यादि। कही भी ऐसा नही है कि बिहार की गिनती देश के शीर्ष राज्यो में की जा सके। बिहार पहले से ही इतना पिछड़ा राज्य ही कि अगर अब थोड़ा भी पीछे गए तो अधिकांश जिलों की हालत अफ्रीका के कुछ बेहद ही गरीब देशों से भी बदतर हो जाएगी।

खैर सारी बातों को दरकिनार रखते हुवे हम फिलहाल सबसे बड़ी समस्या के बारे में बात करे तो बेहतर होगा। और फिलहाल पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी समस्या बन कर आया है covid-19 वैश्विक महामारी। जिसका असर बिहार पे दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। और अगर समय रहते उचित कदम नही उठाये गए तो ये महामारी बिहार को उस गड्ढे में धकेल देगी जिससे निकलना तो दूर की बात है, उस गड्ढे के अंतिम छोड़ से प्रकाश तक नजर नही आएगी। और जैसे हालात फिलहाल बने हुवे है उस हिसाब से तो ऐसा ही प्रतीत होता है कि हम बहुत गहरे संकट में फंस चुके है। ऐसा मैं क्यों कह रहा हूं ये बताने के लिए मैं आप सब को कुछ आंकड़े बताना चाहता हूं, कृपया ध्यान से पढियेगा और जरूर पढियेगा क्योंकि ये हम सब के जीवन का सवाल बन चुका है।

बिहार की आबादी लगभग 12.5 करोड़, जो देश की आबादी का लगभग 9 प्रतिशत है। क्या सुविधा एवं संसाधन में भी हम 9 प्रतिशत का आंकड़ा छू पाए है ?

देश मे सरकारी अस्पतालों की संख्या – 25778 (बिहार में 1147)
देश मे निजी अस्पतालों की संख्या – 43487 (बिहार में 1187)
मतलब कुल – 69,265 में से बिहार में सिर्फ 3034 अस्पताल है। मतलब 4.83%

सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में मौजूद बेड की संख्या पे भी ध्यान दे

देश के सारे सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या – 7,13,986 (बिहार में 11,664)
देश के सारे निजी अस्पतालों में बेड की संख्या – 11,85,242 ( बिहार में 19,193)
कुल – 18,99,228 में बिहार में सिर्फ 30,857। मतलब 1.64 प्रतिशत के आसपास।

देश मे मौजूद icu बेड की संख्या
सरकारी अस्पताल – 35699 (बिहार में 583)
निजी अस्पताल – 59262 (बिहार में 960)
कुल – 94661 (बिहार में 1543) कुल 1.62%

देश मे वेंटिलेटर वाले icu बेड की संख्या
सरकारी – 17850 (बिहार में 292)
निजी – 29631 (बिहार में 480)
कुल – 47,481 (बिहार में 772) कुल 1.63%

ये आंकड़े 20 अप्रैल 2020 तक के है। उसके बाद अगर कुछ सुविधाएं बढ़ी होंगी तो उनको नही जोड़ा गया है।
source – CDDEP एवं PRINCETON UNIVERSITY

अब बात करते है कोरोना जांच से जुड़े कुछ और आंकड़ो की। जिनमे प्रमुख है टेस्टिंग, बेड का ना मिल पाना, एवं सरकार की अनदेखी। आज 18 जुलाई को जब तक मैं ये लेख लिख रहा हूँ तब तक पूरे भारत मे कुल 1,34,33,742 टेस्ट किये जा चुके है। जिनमे से बिहार में अभी तक 3,68,232 टेस्ट हुवे है। यानी भारत मे हुवी कुल टेस्टिंग का मात्र 2.74 प्रतिशत।
और अगर हाल की बात करे तो बिहार मध्यप्रदेश के बाद देश का दूसरा सबसे ज्यादा जोखिम वाला राज्य बन चुका है। बिहार में फिलहाल 9019 एक्टिव केस है, जो बिहार में उपलब्ध सरकारी अस्पतालों के मौजूद बेड की संख्या से लगभग 2000 ही कम है। और ऐसा भी नही हो सकता कि सारे बेड्स सिर्फ कोरोना पेशेंट्स को ही दे दिए जाएं, वरना बाकी के मरीजों के लिए तो फिर कोई जगह ही नही बचेगी।
और बात करे बिहार सरकार के उदासीन रवैये की तो इसका अंदाज़ा सिर्फ इस बात से लगा लीजिये की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने एक बार भी कोरोना वायरस की रोकथाम हेतु विस्तार से एक भी प्रेस वार्ता नही की है। मरीज बेड्स के अभाव में दम तोड़ रहे तो कही ऑक्सीजन के अभाव में मौत को गले लगाना पड़ रहा। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडे भी इन मुद्दे पे चुप्पी साधे हुवे है। और जहाँ तक हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे उस हिसाब से तो यही लगता है कि संबंधित हर विभाग के मंत्री ऐसा गायब होने वाले है कि सूरज लेकर ढूंढने पे भी नही मिलेंगे।

तो फिर समाधान कैसे निकले मैं उसपे भी आना चाहूंगा।
हालांकि सरकार जिस प्रकार से जनता की भलाई को नजरअंदाज करती है या फिर जनता की भलाई को सिर्फ मुफ्त चावल,दाल,आंटे इत्यादि से जोड़ के देखती है उस हिसाब से तो यही लगता है कि वो जनता के बीच से आये हर सलाह को भी नजरअंदाज कर देते है और आगे भी ऐसा करते रहेंगे। फिर भी अगर मेरे मन मे अगर कोई भी उपाय आएगा तो मैं अपनी राय मुखर हो कर रख दूंगा। फिर चाहे कोई सुने या फिर ना सुने। फिलहाल मैं सरकार और जनता दोनों को कुछ सलाह तो अवश्य दूंगा।

बिहार में फिलहाल सबसे बड़ी समस्या तो है महंगे जांच की असुविधा। बिहार चुकी एक गरीब राज्य है इसलिए लोग यहां 4500 या फिर 2500 का जांच करवाएं ये मान के चलना भी बेमानी होगा। बिहार सरकार को फिलहाल के लिए सस्ते और सटीक विकल्पों की तरफ भी देखना चाहिए। जैसे कि अभी कुछ दिनों पहले ही iit दिल्ली ने एक टेस्टिंग किट बनाई है जिसका नाम corosure रखा गया है। इस टेस्टिंग किट की कीमत के बारे में बात की जाए तो दावा है कि ये दुनिया की सबसे सस्ती टेस्टिंग किट है, जिसकी कीमत मात्र 399 रुपये रखी गयी है। अगर इस टेस्टिंग किट के नतीजे अगर सटीक पाए जाते है तो ऐसे विकल्पों पे सरकार को निश्चित ही ध्यान देना चाहिए।
सरकार अगर 50% टैक्स लगा कर भी इस विकल्प को अपनाती है तो एक टेस्ट की कीमत 600 रुपये तक आ जायेगी। ऐसे कीमत पे अगर टेस्ट होने लगे तो हल्के फुल्के लक्षण आने पर भी लोग खुद ही जांच करवा लेंगे। और मान ले कि इस किट के नतीजे सटीक नही भी आये तो सरकार को अन्य सस्ते विकल्पों पे भी ध्यान देना चाहिए।

दूसरी समस्या है अस्पतालों में बेड्स का अभाव। तो कोरोना में अब अधिकांश लोग होम आइसोलेशन की प्रक्रिया से ठीक हो रहे है। लेकिन उसके लिए भी हर व्यक्ति को पता होना चाहिए कि वो इस बीमारी से सुरक्षित है या नही। जिसके लिए टेस्टिंग जरूरी है। बात रही बेड्स की तो सरकार को इसके लिए भी उपाय ढूंढने पड़ेंगे। खाली पड़े स्कूल, निर्माणाधीन सरकारी भवन, अपनी इक्षा से दी जाने वाले निजी होटल इत्यादि को इस्तेमाल करके सरकार को आइसोलेशन सेंटर और बेड्स का अभाव दूर करना पड़ेगा।
हाल ही में एक अच्छा उदाहरण पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में 100 बेड की व्यवस्था कर के पेश की गई है।
ऐसे कदम अभी लगातार उठाने पड़ेंगे।

जनता से मास्क और हाथ धोने से सम्बंधित कुछ सलाह भी है।
अगर 2 या उससे ज्यादा व्यक्ति अगर बिना मास्क के सम्पर्क में होते है, और यदि उनमें से एक व्यक्ति भी अगर संक्रमित है तो सामने वाले के संक्रमित होने की संभावना 90% तक मानी गयी है। अगर सभी व्यक्ति मास्क पहन कर के 3 फिट की दूरी से संपर्क में आये तो ये संभावना घट कर 1.5% पर आ जाती है। वही अगर मास्क के साथ दूरी बढ़ के 6 फिट या इससे ज्यादा हो जाये तो संक्रमण की संभावना 0% पे आ जाती है।
मास्क के महत्व को समझे, नियमित व्यायाम कर के अपने इम्युनिटी को बढ़ाये, हाथ धोते रहे।
सरकार के भरोसे ना बैठे, सरकार राम भरोसे बैठी हुई है।
उन्हें फिलहाल सिर्फ चुनाव की चिंता है।

धन्यवाद,
आपका ‘सम्मी कुमार’

Leave a Comment

46 − 38 =