बीसीए के पूर्व पदाधिकारी अपने अस्तित्व के लिए रच रहें हैं बड़ा कुचक्र :- कृष्णा पटेल

पटना:  बीसीए मीडिया कमेटी के संयोजक कृष्णा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपने बयान में कहा है कि एक ओर जहां बीसीए के वर्तमान पदाधिकारीगण बिहार में क्रिकेट का विकास को लेकर नई – नई योजनाएं बनाकर सभी जिला संघों व खेल और खिलाड़ियों के हित में कार्य कर रही है और हर जिला में क्रिकेट की आधारभूत संरचनाएं को विकसित करने के लिए अपने मास्टर प्लान पर काम कर रही है।
ताकि आने वाले दिनों में बिहार के खिलाड़ियों को बेहतर से बेहतर सुविधा प्राप्त हो सके और बिहार क्रिकेट संघ एक ऐसा क्रिकेट का रोड मैप तैयार कर योजनाबद्ध तरीके के अपना कार्य करने के लिए तत्पर है।
जिसे बिहार क्रिकेट संघ में स्वर्णिम काल के रूप में याद किया जा सके और आने वाले दिनों में बीसीए की नई कमेटी के लिए अनुकरणीय हो।
वहीं बीसीए के पूर्व पदाधिकारी जिनका कार्यकाल हमेशा विवादों से घिरा रहा और बिहार क्रिकेट संघ को शर्मसार कर देने वाली घटनाएं भी मीडिया द्वारा दिखाया गया था। वो अब बीसीए की वर्तमान कमेटी की छवि को भी धूमिल करने के लिए सोची – समझी राजनीति के तहत एक बड़ा कुचक्र रच रहे हैं।
पूर्व पदाधिकारी द्वारा ऐसे-ऐसे कारनामे किए जा रहे हैं जो उनके प्रतिष्ठा के खिलाफ है।
अपने अस्तित्व बचाने के लिए पूर्व पदाधिकारी और पर्दे के पीछे से हवा देने वाले चंद लोग जो कभी बीसीए से निलंबित सचिव के खिलाफ कुचक्र रचते हैं। तो कभी मामला नहीं बनने पर बीसीए के सम्मानित अध्यक्ष महोदय के खिलाफ कुचक्र रचते हैं।
हद तो तब हो गई जब लाख प्रयास करने पर भी इनकी दाल नहीं गली तो अब बीसीए में जातीय कार्ड खेलना शुरू कर दिए हैं और जिला संघों को भ्रमित करते फिर रहे हैं।
जो लोग आज ऐसा कर रहे हैं वही लोग कभी बीसीए अध्यक्ष श्री राकेश कुमार तिवारी जी की प्रशंसा करते नहीं थकते थे। जिसे मीडिया ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
आज ऐसा क्या हो गया और उन्होंने ऐसा क्या किया जो एकाएक इतने बुरे हो गए ।
मतलब साफ है कि पद से दूर रहने के बावजूद अपने हिसाब से बीसीए चलाना चाहते थे।
लेकिन दूरगामी सोच वाले बीसीए अध्यक्ष ने जब इनकी मंशा को समझ गए तो इनकी बेचैनी बढ़ गई और आज बीसीए को बदनाम करने के लिए तरह-तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाते फिर रहें हैं और गंदी साजिश रच रहे हैं।

जिसमें पर्दे के पीछे से एक बड़ा विलेन की भूमिका ऐसे लोग निभा रहे हैं । जो अपने – आपको बिहार क्रिकेट का मसीहा बताते फिरते हैं। जबकि सच्चाई कुछ और ही है। क्योंकि इनको पता है कि अगर बीसीए में सब कुछ ठीक से चलता रहेगा तो मेरी महत्ता और वजूद के साथ- साथ हमारा जो सपना है वो भी बीसीए के विकास के साथ दफन हो जाएगा।
इसीलिए हमेशा से इनका प्रयास रहा है कि बीसीए कमेटी से नाराज लोगों के साथ अपना सांठ- गांठ कर अपनी रोटी सेंकते रहें और अपनी अस्तित्व की लड़ाई – लड़ कर बचाते रहें
जिन पर यह कहावत फिट बैठती है कि :- “बकरी पाती खात है, ताकि काढ़ी खाल।
जो नर बकरी खात है, ताको कौन हवाल।। ”
इसीलिए मैं क्रिकेट के रहनुमाओं से आग्रह करता हूं कि आप लोग किसी प्रकार के भ्रम में न रहें और बिहार क्रिकेट संघ का विकास के साथ- साथ खेल और खिलाड़ियों के हित में कार्य कर अपना योगदान दें।
जो लोग ऐसा कर रहे हैं उनको बिहार के खिलाड़ी कभी माफ नहीं करेंगे।

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