शिक्षा से सशक्तिकरण तक, नीतीश माॅडल बना देश के लिए नजीर – अरविंद निषाद पटना
जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता अरविंद निषाद ने सोशल संवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शिक्षा,रोजगार एवं सामाजिक न्याय के माॅडल से बिहार को नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद एवं राबड़ी देवी शासनकाल में बिहार की तस्वीर शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था और रोजगार के मामले में बेहद खराब थी। उस समय विद्यालयों में शिक्षक नहीं होते थे, जहाँ शिक्षक होते थे वहाँ कमरे नहीं होते थे, और जहाँ कमरे होते थे वहाँ छात्र नहीं होते थे। शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई थी, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता संभालने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन किया और विद्यार्थियों के लिए नई योजनाएं लागू कर पठन-पाठन को व्यवस्थित किया।
पहले बच्चियों की संख्या स्कूलों में बेहद कम हुआ करती थी, परंतु साइकिल और पोशाक जैसी योजनाओं के माध्यम से आज बिहार की बेटियाँ आत्मनिर्भर होकर विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रत्येक पंचायत में ़2 विद्यालयों की स्थापना कर शिक्षा को सुलभ बनाया और हजारों युवाओं को शिक्षक के रूप में रोजगार देकर स्कूलों से जोड़ा। यही नहीं, तकनीकी शिक्षा में भी क्रांतिकारी बदलाव हुआ है। पहले राज्य में मात्र दो इंजीनियरिंग काॅलेज थे, लेकिन अब पूरे बिहार में तकनीकी संस्थानों की संख्या कई गुना बढ़ गई है।
जब 2005 के पहले साक्षरता दर मात्र 47.53ः थी और महिला साक्षरता 33.57ः थी, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे बदलने का बीडा उठाया। शिक्षा के बजट में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और साल 2025-26 में ये बढकर 60 हजार करोड रुपए से ज्यादा का हो गया है । हाल ही में स्थापित जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय कौशल-आधारित शिक्षा का नया केंद्र बनेगा और आने वाले वर्षों में बिहार के युवा पूरे देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी सेवाएँ देंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक न्याय और आरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक फैसले लिए। पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को 50ः आरक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाया, जिससे आज बिहार की महिलाएँ नेतृत्वकारी भूमिकाओं में हैं। सरकारी नौकरियों और पुलिस बल में भी महिलाओं को 35ः तक आरक्षण देकर उन्हें अवसर प्रदान किया गया।
न्यायिक सेवाओं में पिछडा और अति पिछडा वर्ग को आरक्षण देना, अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना और नगर निकाय चुनावों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना, यह सब नीतीश कुमार जी के समाजवादी और न्यायप्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है। उनके नेतृत्व में शिक्षा से लेकर प्रशासन तक में समान अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
बिहार के प्रत्येक जिले में अत्यंत पिछड़ा वर्ग छात्रावास का निर्माण कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए हाॅस्टल, डिजिटल लाइब्रेरी, छात्रवृत्ति और भोजन की व्यवस्था की गई है। इन योजनाओं से बड़ी संख्या में बिहार के छात्र आज अधिकारी और पदाधिकारी बनकर राज्य और राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समाजवादी आंदोलन की पृष्ठभूमि से निकले नेता हैं और उन्होंने अपने फैसलों से बिहार में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक क्रांति की है। बिहार आज देश के लिए एक माॅडल स्टेट के रूप में स्थापित हुआ है और यह बदलाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णय क्षमता का परिणाम है।