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गंगा स्नान दान सतुआन
14 अप्रैल 2023 ई
🪷चंडिका नवमी
मेष राशि सूर्य दिन में 4: 47
सत्तू सक्रांति या सतुआ सक्रांति भी कहते हैं
इसी के साथ खरवास समस्त हो जाएगा किंतु गुरु के अस्त के कारण विवाह आदि शुभ काजू के लिए मुहूर्त शुरू
नहीं हो पाएगा
सतू खाना खिलाना एवं ऋतु फल के साथ सतू का दान करना
पुण्य कारक को होगा
यह सक्रांति वर्ष भर की सबसे महत्वपूर्ण संक्रांति होती ती है
इसमें गंगा स्नान करके दान पुंय करना अत्यंत पुण्य फल कारक माना जाता है
चूंकि सूर्य की सक्रांति
शुक्रवार के दिन पड रही है इसीलिए संवत्सर के मंत्री का पद शुक्र ग्रह को प्राप्त हो गया है
शुक्रवार की संक्रांति शुभ फल कारक होगी एवं दैनिक उपभोग कि वस्तुये जैसे फल सब्जी छेना पनीर दूध दही इत्यादि क भाव सस्ता ही चलेगा
कृष्ण पक्ष में तिथि का टूटना शुभ फल कारक माना जाता है
कूल मिलाकर यह पक्ष देश काल एवं जनता के लिए शुभ फल कारी है
अमावस्या चतुर्ग्राही
आंधी पानी बरसा करा सकते है
सूर्य के मीन से मेष राशि में आने के दिन को मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है. वहीं इसे उत्तर भारत के लोग सत्तू संक्रांति या सतुआ संक्रांति के नाम से जानते हैं. इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण की आधी परिक्रमा पूरी कर लेते हैं. इसके साथ ही खरमास का समापन हो जाता है और सभी प्रकार के मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं. मेष संक्रांति को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाते हैं. इसे उत्तर भारत समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में सतुआन
के रूप में मनाते हैं और इस दिन अपने इष्ट देव को गुड़ (मीठा) सत्तू अर्पित करते हैं और इसके बाद खुद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. आइए जानते हैं इस साल कब है सतुआन और क्या है इसे मनाने का महत्व…
क्यों मनाने हैं सतुआन का पर्व?
सामान्यतः हर वर्ष सतुआन का पर्व 14 या 15 अप्रैल को ही पड़ता है. इस साल यह पर्व
14 अप्रैल को मनाया जाएगा. बता दें कि इस दिन सूर्य राशि परिवर्तित करते हैं. इसके साथ ही इस दिन से ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है. सतुआन के दिन सत्तू खाने की परंपरा बहुत लंबे समय से चली आ रही है. इस दिन लोग देवी देवता को मिट्टी के घड़े में पानी, गेहूं, जौ, चना और मक्के का सत्तू साथ में आम का टिकोरा अर्पित करते हैं. इसके बाद इसे खुद प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.
आज ही के दिन शिव मंदिर में शिवजी की ऊपर जलधारा (पानी वाला घड़ा) लगाया जाता है
संतोष पाठक




