फर्स्ट डिवीजन नहीं तो पैसा वापस कहीं यह हौसला टूट ना जाए

कोरोना महामारी से आज पूरा विश्व ग्रसित है बड़े, छोटे, मध्यम सभी तरह के व्यवसाय इसकी चपेट में आए कोचिंग संस्थान भी इनमें से एक है / कई बड़े कोचिंग की स्थिति नाजुक हो चुकी है छोटे कोचिंग तो लगभग बंद ही होते जा रहे हैं / होली से पहले की जो छुट्टी दी गई कोचिंग में उसके बाद से लॉक डाउन का प्रभाव हो गया कोचिंग खुला ही नहीं इधर कोचिंग का किराया, स्टाफ का खर्च लगातार कोचिंग डायरेक्टरों को पर भारी होता जा रहा है निकट भविष्य में कोचिंग खोलने की भी संभावना नहीं दिख रही है यदि कोचिंग खोल भी दिया जाए तो तुरंत बच्चे आएंगे इसकी भी गारंटी नहीं है ऐसी स्थिति में कोचिंग में पढ़ाने वाले टीचर की स्थिति भी दयनीय होती जा रही है इसी संदर्भ में स्वाट कॉमर्स के डायरेक्टर बिहार रत्न एवं बिहार विभूति अवार्ड से सम्मानित कुमार पीयूष राज जी के साथ इन विषयों पर बात की गई पीयूष जी ने बताया कि सरकार एक कोचिंग के लिए भी गाइडलाइन बनाए और कुछ आर्थिक मदद पहुंचाएं जिससे वह अपने स्टाफ को कुछ पैसे दे सकें क्योंकि लॉक डाउन में वह नहीं चाहते हैं कि किसी भी कोचिंग से कोई भी स्टाफ निकाला जाए लेकिन यह भी सत्य है कि जो स्थिति बनी हुई है इसमें आर्थिक बोझ बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाएगा ऐसे पढ़े-लिखे युवा जिन्होंने कोचिंग को ही अपना रोजगार बनाया है वह भी अपने रोजगार से वंचित हो जाएंगे अतः सरकार से उन्होंने अनुरोध किया है की कोचिंग के लिए भी गाइडलाइन बना दी जाए जिससे यह सुचारू रूप से चल सके

आपको बता दें कि पीयूष राज जी ऐसे पहले टीचर हैं जिन्होंने कहा फर्स्ट डिवीजन नहीं तो पैसा वापस अभी तक का इनका रिकॉर्ड बहुत शानदार रहा है सेकंड आने वाले बच्चों की संख्या इनके पास दहाई में भी नहीं है लगभग सभी बच्चे फर्स्ट करते हैं जो सेकंड आ जाते हैं उनका पैसा वह वापस कर देते हैं तो ऐसी स्थिति में यदि उन्हें सरकार से सहायता नहीं मिलेगी तो निश्चित तौर पर व अपने इस मुहिम को बंद करने के लिए मजबूर होंगे और यह कहानी केवल उनकी ही नहीं कई कोचिंग संस्थानों की है /

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