प्रह्लाद के अलावा पूतना और कामदेव के कारण भी होली मनाया जाता है

बुराई-परअच्छाई की विजय के उपलक्ष्य में मनाई जाती है होली।

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को होलिका दहन जिसे (छोटी होली भी कहते हैं) के अगले दिन पूर्ण हर्षोल्लास के साथ रंग खेलने का विधान है और अबीर-गुलाल आदि एक-दूसरे को लगाकर व गले मिलकर इस पर्व को मनाया जाता है। हिंदुओं के लिए होली का पौराणिक महत्व भी है। इस त्योहार को लेकर सबसे प्रचलित है प्रहलाद, होलिका और हिरण्यकश्यप की कहानी।

होलिका दहन की पौराणिक कथा👌

(१) पुराणों के अनुसार दानवराज हिरण्यकश्यप ने जब देखा कि उसका पुत्र प्रह्लाद सिवाय श्रीहरि विष्णु भगवान के किसी अन्य को नहीं भजता, तो वह क्रुद्ध हो उठा और अंततः उसने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए, क्योंकि होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि नुकसान नहीं पहुंचा सकती। किन्तु हुआ इसके ठीक विपरीत, होलिका जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ। इसी घटना की याद में इस दिन होलिका दहन करने का विधान है।

(२) होली की एक कहानी कामदेव की भी है। माता पार्वती भगवान् शिव से विवाह करना चाहती थीं लेकिन तपस्या में लीन शिव का ध्यान उनकी तरफ गया ही नहीं। ऐसे में (प्यार के देवता कामदेव) आगे आए और उन्होंने शिव पर पुष्प बाण चला दिया। तपस्या भंग होने से शिव को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी और उनके क्रोध की अग्नि में कामदेव भस्म हो गए। कामदेव के भस्म हो जाने पर उनकी पत्नी रति रोने लगीं और शिव से कामदेव को जीवित करने की गुहार लगाई। अगले दिन तक शिव का क्रोध शांत हो चुका था, उन्होंने कामदेव को पुनर्जीवित किया। कामदेव के भस्म होने के दिन होलिका जलाई जाती है और उनके जीवित होने की खुशी में रंगों का त्योहार मनाया जाता है।
(३) होली का भगवान् श्रीकृष्ण से गहरा रिश्ता है। जहां इस त्योहार को (राधा-कृष्ण) के प्रेम के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। वहीं,पौराणिक कथा के अनुसार जब कंस को श्रीकृष्ण के गोकुल में होने का पता चला तो उसने पूतना नामक राक्षसी को गोकुल में जन्म लेने वाले हर बच्चे को मारने के लिए भेजा। पूतना स्तनपान के बहाने शिशुओं को विषपान कराना था। लेकिन श्रीकृष्ण उसकी सच्चाई को समझ गए। उन्होंने दुग्धपान करते समय ही पूतना का वध कर दिया। कहा जाता है कि तभी से होली पर्व मनाने की मान्यता शुरू हुई।
इस वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ २८ मार्च दिन रविवार को प्रात: ०३ बजकर २७ मिनट पर हो रहा है, जिसका समापन देर रात १२ बजकर १७ मिनट पर होगा। ऐसे में होलिका दहन २८ मार्च को होगा। इस दिन आपको होलिका दहन के लिए ०२ घंटे २० मिनट का समय प्राप्त होगा। इस दिन होलिका दहन मुहूर्त शाम को ०६ बजकर ३७ मिनट से रात ०८ बजकर ५६ मिनट तक है।
होली (हर्सोल्लास) का पर्व संदेश देता है कि इसी प्रकार ईश्वर अपने अनन्य भक्तों की रक्षा के लिए सदा उपस्थित रहते हैं।

🙏पंo गोपाल मिश्र 🙏
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