नाग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं

?’सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।’

अर्थात् – संपूर्ण आकाश, पृथ्वी, स्वर्ग, सरोवर-तालाबों, नल-कूप, सूर्य किरणें आदि जहां-जहां भी नाग देवता विराजमान है। वे सभी हमारे दुखों को दूर करके हमें सुख-शांतिपूर्वक जीवन दें। उन सभी को हमारी ओर से बारम्बार प्रणाम हो…।

माँ सिद्धेस्वरी से यही विनती है कि माँ हम सभी भक्तजनों को इतना सामर्थवान बनाओ ताकि हम अपने देश की उन्नति के लिए यथा संभव योगदान दे सके।

आचार्य संजय कुमार तिवारी (शशि बाबा)
मुख्य पुजारी
सिद्धेश्वरी काली मंदिर

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