बिहार विधान परिषद से एक दिन का निलंबन बिहार के राजनीतिक सुर्खियों में है सुनील कुमार सिंह

राजद विधान पार्षद सह बिस्कोमान के चेयरमैन सुनील कुमार सिंह का बिहार विधान परिषद से एक दिन का निलंबन बिहार के राजनीतिक हलकों में सुर्खियों में है सुनील कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के संयुक्त तस्वीर को सदन में दिखाया था। बिहार विधान परिषद में सुनील कुमार सिंह के रूप में विपक्ष को एक प्रखर स्वर मिला है सुनील कुमार सिंह पूरी तैयारी के साथ सदन में जाते हैं जिस विषय को उठाते हैं तथ्यों का अंबार लगा देते हैं। बिहार विधान परिषद में जब सुनील कुमार सिंह बोलने के लिए खड़े होते हैं तो पूरा सदन चौकन्ना हो जाता है कि आज सुनील कुमार सिंह किस की खिंचाई करने वाले हैं हालांकि वाणी में पूरी तरह संयम रहता है व्यक्तिगत आक्षेप से बचते हैं अपने चूटीले अंदाज से विरोधियों पर बार तो करते हैं पर तथ्यों के साथ सदन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुनील कुमार सिंह के बीच कई बार टकराहट की स्थिति आई है बावजूद इसके सुनील कुमार सिंह मुख्यमंत्री पर कभी भी कोई भी व्यक्तिगत टीका टिप्पणी करने से बचते हैं संसदीय परंपराओं के लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करते बिहार विधान परिषद से एकदिन के निलंबन के मामले को लेकर सड़क से लेकर सदन तक में हंगामा छाया हुआ है आशा है कि बुधवार को सुनील कुमार सिंह जब सदन में लौटेंगे तो नए तेवर और नए विषयों के साथ सरकार का घेराव करेंगे। तत्कालिक मुद्दों को लेकर आज सुनील कुमार सिंह से मुलाकात हुई बिहार दिवस पर बॉलीवुड के गायक कैलाश खेर व अन्य गायकों के बुलाने पर उन्होंने आपत्ति की उन्होंने कहा कि बिहार का मान सम्मान बिहार की कला संस्कृति काफी समृद्ध है पद्म विभूषण शारदा सिन्हा मैथिली ठाकुर भरत शर्मा जैसे असंख्य बिहारी कलाकार है जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक नाम अर्जित कर चुके हैं बिहार का मान सम्मान बड़ा चुके हैं ऐसे में बिहार सरकार को बताना चाहिए कि लाखों रुपए खर्च कर कैलाश खेर जैसे गायकों के को बुलाने से बिहार का कितना मान सम्मान बढ़ा है किसी भी प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया जाता है तो उस प्रदेश के स्थापित कलाकारों को सबसे पहले मंच दिया जाता है सम्मान दिया जाता है। सुनील कुमार सिंह ने कहा कि वे किसी भी प्रकार के धमकियों से डरने वाले नहीं हैं संसदीय परंपराओं के तहत सदन में आम आदमी से जुड़े हुए सवालों को पूरी प्रखरता से उठाते रहेंगे।

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