बिहार के मुख्यमंत्री के नाम खुला पत्र — नरेंद्र सिंह

 श्री नीतीश कुमार जी
माननीय मुख्यमंत्री, बिहार

आपको ज्ञात हो कि मैं विगत 22/10 /2020 से काफी अस्वस्थ हूं। आप अवगत ही हैं कि मैं राज्य के सबसे उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र का रहने वाला हूं। संपूर्ण जमुई जिला उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है। यह मेरा मुख्य कार्यक्षेत्र है।
मुझे उग्रवादियों से रक्षा हेतु सर्वप्रथम वर्ष 2007 में गृह विभाग से पत्रांक 9741 दिनांक 10/9/2007 के द्वारा राज्य सरकार से वाई श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। सरकार ने पुनः वर्ष 2009 में मेरे ऊपर आसन खतरों को देखते हुए मेरी सुरक्षा को जेड श्रेणी में रखा। बिहार सरकार गृह विभाग के पत्रांक 5831 दिनांक 4 अगस्त 2009 के द्वारा मुझे जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। इतना ही नहीं आपको गृह विभाग से अवश्य ही सूचना प्राप्त हुई होगी कि वर्ष 2014 में जिला अधिकारी जमुई एवं आरक्षी अधीक्षक जमुई ने पत्रांक 1836 दिनांक 27/10/2014 को मेरे जान माल पर गंभीर खतरा को देखते हुए मेरी सुरक्षा को जेड प्लस श्रेणी प्रदान करने हेतु पुलिस महानिदेशक बिहार एवं गृह विभाग को अनुशंसा भेजा। फिर पुनः जिला विशेष शाखा पदाधिकारी जमुई के ज्ञापन 123/2014 के सूचना के आधार पर मेरी सुरक्षा को जेड श्रेणी से जेड प्लस करने की अनुशंसा पत्रांक 1964 दिनांक 14/11/2014 के द्वारा प्रधान सचिव गृह विभाग बिहार सरकार को भेजा गया।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों से आपकी संवेदनशील सरकार आखिर मौन क्यों साधे रही? इतना ही नहीं आप जब 2015 में चुनाव के बाद पुनः मुख्यमंत्री हुए तो आपने निर्देश देकर मेरी सुरक्षा जेड से घटाकर वाई श्रेणी में करा दिया।
नीतीश जी, क्या यह कार्य आपने प्रतिशोध और ईर्ष्या से प्रेरित होकर किया?
नीतीश जी, आप भूल गए कि 2005 में मैंने लोजपा के 22 विधायक एवं निर्दलीय 19 विधायक को एक साथ जोड़ कर आपको मुख्यमंत्री के पद पर बिठाया था।
नीतीश जी, क्या आप भूल गए छात्र जीवन के प्रारंभिक दौर में हम लोग एक संगठन में एक साथ काम करते रहे हैं आपको स्मरण होगा कि बिहार में चल रहे छात्र आंदोलन के संचालन समिति का सदस्य नहीं थे। मैंने काफी जद्दोजहद के बाद आपको शामिल कराया था हम लोग आपातकाल में कई महीने भूखे प्यासे रहकर कई रातें साथ-साथ बिताई। मैं और आप भूमिगत रहते हुए छुपते छुपाते मुंबई के जसलोक अस्पताल में लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी से मुलाकात कर आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने में लगे रहे।
आप यह भी कैसे भूल गए कि 1989 में वीपी सिंह के नेतृत्व वाली जनता दल के प्रत्याशी के रूप में आप बाढ़ संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे। और आपके विरुद्ध कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम लखन सिंह यादव प्रत्याशी थे। मैंने गांव गांव जाकर आप के पक्ष में प्रचार किया था।
मतदान के दिन मैं और मिथिलेश भाई रुकनपुरा गांव से लेकर बाढ़ के सुदूर गांव तक राजपूत समाज के तमाम मतदाताओं को किसी प्रकार आपके पक्ष में भरपूर मतदान कराया था। जबकि प्रायः राजपूत मतदाता राम लखन सिंह यादव के पक्ष में कार्य कर रहे थे। उस वक्त संचार व्यवस्था अच्छी नहीं थी और उसी दिन विश्वनाथ प्रताप सिंह के रिश्तेदार संजय सिंह जो यूपी के वरिष्ठ नेता थे उन्हें गोली मारी गई थी थी। जिसकी सूचना बाढ़ के लोगों को नहीं थी। यह सूचना मैं और मिथिलेश कुमार सिंह मोटरसाइकिल से घूम घूम कर सैकड़ों राजपूतों के गांव में जब पहुंचाया तो लगभग डेढ़ लाख मतदाताओं ने आपके पक्ष में मतदान किया। आप बहुत ही कम मतों से विजई हुए थे।
खैर छोड़िए इन दिनों को भी आप भूल गए। इतना तो स्मरण होगा ही जेपी आंदोलन के संचालन में मेरी भूमिका आप लोगों से अग्रणी रही है। आपकी भूमिका भी कम नहीं थी। जेपी आंदोलन के बाद हम लोगों के संबंध काफी घनिष्ठ रहे हैं।
मैं 1990 में मंत्री हुआ और जनता दल के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष दलित परिवार से आने वाले श्री राम सुंदर दास को आप लोगों ने एक गुट बनाकर हटाने का जो काम किया मैं उसी वक्त मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उसके कुछ ही दिनों बाद आप भी जॉर्ज साहब के नेतृत्व में जनता दल छोड़कर समता पार्टी का गठन किया था।
हम लोग अलग-अलग संगठनों के माध्यम से बिहार में जंगलराज का विरोध करते रहे। जिसका प्रतिफल 2005 के विधानसभा में प्राप्त हुआ। और मैंने डटकर आप का साथ दिया और आप बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर प्रतिष्ठित हुए।
आप तथा प्रभुनाथ सिंह, ललन सिंह, अरुण कुमार सिंह मेरे घर पर आकर मुझे मंत्री बनने के लिए आग्रह किया। मैं मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होना चाहता था। मैं संगठन का कार्य करना चाहता था। किंतु आप सबों के आग्रह पर मैं मंत्रिमंडल में शामिल हुआ। मुझे कृषि विभाग एवं खाद्य उपभोक्ता विभाग की जिम्मेवारी आपने सौंपी।
मैंने ईमानदारी एवं निष्ठा पूर्वक इन विभागों में जान फूंकने का कितना कठिन संघर्ष किया। इससे आप भी अवगत हैं।
कृषि विभाग किस दुर्दशा में थी आप भूले नहीं होंगे आपको स्मरण होगा कि मेरे कृषि मंत्री रहते ही बिहार को वर्ष 2011-12 एवं वर्ष 2012-13 में कृषि उत्पादन के लिए सर्वोच्च उत्कृष्ट सम्मान कृषि कर्मण पुरस्कार बिहार को प्राप्त करने का सौभाग्य मिला क्या इससे आपका सम्मान नहीं बढ़ा? मेरे प्रयास से देश का सबसे उत्तम कृषि रोडमैप 2022 तक के लिए तैयार कराया था। क्या उस कृषि रोडमैप पर कोई कार्य हो रहा है?
नीतीश जी, मैं आपके साथ रहते हुए बराबर सही परामर्श देने का प्रयास करता रहा। कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा और अपमान को समाप्त करने की सलाह देता रहा। प्रशासनिक त्रुटियों की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराता रहा। दल हित में मैंने आपको बराबर अच्छे सुझाव देता रहा।
आपको स्मरण होगा वर्ष 2014 में जब एनडीए से अलग होकर आप चुनाव लड़ने का फैसला लिया था तो मैंने अनुभवी और कर्मठ प्रत्याशियों के चयन के लिए आग्रह किया था। आपने मेरी एक भी नहीं सुनी और मनमाने ढंग से आपने टिकट का बंटवारा किया, जिसका दुष्परिणाम हुआ कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मात्र 2 सीटों पर ही जीत दर्ज हो सकी।
आप हताशा और निराशा के दौर में चले गए और मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। पुनः जरा याद कीजिए मैंने आपके इस निर्णय का भी विरोध किया था। आप की सरकार को कोई खतरा नहीं था। आपने छलावा के रूप में यह घोषणा कर दल का बहुत ही अहित किया।
मैंने उस वक्त भी सभी विधायकों को लेकर धरना पर बैठ गया था। आपने 1 दिन की मोहलत मांगी थी अपने पुनर्विचार के लिए। किंतु दूसरे दिन आपने मुझसे काफी अनुनय विनय कर मुझे मना लिया।
विधायक दल ने आपको नया नेता मनोनीत करने का अधिकार सौंप दिया। आपने श्री जीतन राम मांझी को अपना नॉमिनी मानते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए नाम पेश किया। जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार करते हुए आपको साधुवाद दिया था की आप ने एक दलित परिवार को बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाया।
श्री जीतन राम मांझी सरकार का नेतृत्व सुचारू रूप से कर रहे थे। भले ही थोड़े अनुभव की कमी उनमें थी। यहां आपकी जिम्मेदारी थी कि अपने अनुभव से मार्गदर्शन कराते।
किंतु मात्र 3-4 महीने के बाद ही आपके कुछ खास लोग आम दरबारी और चापलूस किस्म के लोगों ने श्री जीतन राम मांझी पर हमला शुरू कर दिया जो कदापि सरकार और दल के हित में नहीं था।
आपको स्मरण होगा मैं उस दरमियान लगातार आपसे मिलकर श्री मांझी के विरोध करने वालों को नियंत्रित करने का अनुरोध करता रहा।
किंतु आपने मेरी बातों की घोर उपेक्षा की तथा विरोध करने वालों को आपने बढ़ावा दिया। आप श्री मांझी को मुख्यमंत्री पद से हटाने की जिद पर अड़ गए। मैंने तब भी आपको समझाया था कि ऐसा करने से आप की छवि दलित विरोधी मानी जाएगी। यह मैंने आपके हित में कहा था। किंतु आपने इसे उल्टे रूप में लिया और मुझे ही आप के कोप भाजन का शिकार बनना पड़ा।
आपके इस दलित विरोधी लोहिया, जेपी, गांधी के आदर्शों के विपरीत आचरण के कारण मैंने डट कर आपका विरोध किया। तथा जीतन राम मांझी के साथ अंतिम क्षण तक डटकर खड़ा रहा।
अंततोगत्वा आप पुनः मुख्यमंत्री हो गए और तब से आप मेरे प्रति द्वेष और दुर्भावना से ग्रसित होकर कदम उठाने लगे।
और इसी दुर्भावना और जलन से ग्रसित होकर आपकी सोच इतनी निम्न हो गई कि मुझे जो सुरक्षा हेतु जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी उसे वर्ष 2016 में आपने समाप्त कर मेरी सुरक्षा खत्म कर दिया।
मैंने बार-बार आपसे पत्र लिखकर तथा मिलकर अपनी सुरक्षा को बढ़ाने की अनुरोध करता रहा लेकिन आपने कभी भी इसे गंभीरता से नहीं लिया।
जबकि जमुई जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी जमुई, आरक्षी अधीक्षक जमुई तथा जिला विशेष शाखा जमुई के द्वारा राज्य सरकार को मेरी सुरक्षा जेड प्लस करने की अनुशंसा भेजा जाता रहा। जिसका पत्रांक दिनांक इसी पत्र में ऊपर उल्लेखित है।
मुझे वॉइ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त होने के कारण मेरे निवास पर तैनात हाउस गार्ड को दिनांक 4-11-2020 को हटा लेने का औचित्य क्या है यह बिहार के लोग आपसे जानना चाहेंगे।
अंत में आपसे इतना ही कहूंगा आप स्वयं अपने हृदय पर हाथ रखकर यह विश्लेषण करें कि मेरा योगदान विगत के 50 वर्षों में बिहार की राजनीति में किस नेता से कम है।
आज भी मेरी जिंदगी संपूर्ण राज्य की जनता को समर्पित है।
भ्रष्टाचार, अत्याचार, अन्याय, गुंडाराज, अपराधियों तथा उग्रवादियों के विरुद्ध मेरा अभियान सतत जारी है और रहेगा। मेरे जीवन और मेरे जान-माल और पूरे परिवार को आज भी उपरोक्त तत्वों से खतरा बना हुआ है।
क्या सरकार को मेरे जानमाल की हिफाजत की चिंता नहीं करनी चाहिए?
जबकि आज दरबारी चापलूसी तथा सत्ता का जयकारा लगाने वाले आपराधिक मामलों में लिप्त ऐसे अनेक लोगों को आपकी सरकार ने भरपूर सुरक्षा दे रखी है जो ना तो सामाजिक और राजनैतिक तौर पर महत्वपूर्ण है। वे सिर्फ तामझाम दिखाकर और अपने रुतबा से समाज को डराने धमकाने का उपयोग करते हैं। ऐसे नासूर लोगों को पुलिस की सुरक्षा प्रदान करना कहां तक उचित है?
इसका जवाब आपको देना चाहिए।
मैं आपसे सुरक्षा की भीख नहीं मांग रहा हूं मेरी सुरक्षा भगवान करेंगे तथा बिहार की जनता स्वयं करेगी।
15 वर्ष पहले वाला नीतीश कुमार कहां खो गया मैं इसी से आहत हूं।
नीतीश जी एक बार ईमानदारी से अपनी अंतरात्मा को झांकने की कोशिश कीजिए आप क्या थे और क्या हो गए। दरबारी, चापलूसी, दरबार में वृदावली गाने वालों के चक्कर में आज आप कहां पहुंच गए? इस पर चिंतन मंथन अवश्य करना चाहेंगे।
शुभकामनाओं सहित
आपका
नरेंद्र सिंह

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