नीलामी से हासिल होने वाली रकम ‘नमामि गंगे’ परियोजना पर होगी खर्च

टोक्यो पैराओलंपिक्स 2020 में हरियाणा के रहने वाले सुमित अंतिल ने जेवेलिन फेंक कर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। वे जितनी दूर तक भाला फेंक सकते थे वहां तक फेंका और किसी को नहीं पता था कि उनकी इस कोशिश से विश्व कीर्तिमान बन जाएगा। उन्होंने 68.55 मीटर दूर भाला फेंक कर ना सिर्फ जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया। सुमित भारत लौटे तो उन्होंने अपने हस्ताक्षर कर अपना जेवलिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट कर दिया। इस जेवलिन को अब कोई भी हासिल कर सकता है। इसके लिये बस pmmementos.gov.in/ पर चल रही online bid में हिस्सा लेना है। 17 सितंबर से शुरू हुई यह नीलामी 7 अक्टूबर तक चलेगी।

ओलंपिक में जिस जेवलिन यानी भाले ने स्वर्ण पदक जीत लिया हो उसे छू भर लेने की इच्छा ना जाने कितने दिलों में होगी। और वही भाला किसी को हमेशा के लिये मिल जाए तो कैसा रहे। वैसे तो इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन जिस चीज़ की आप कल्पना भी नहीं कर सकते वह आपके लिये आसानी से उपलब्ध है।
दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को ऐसा नायाब मौका दे रहे है कि वे देश के गौरव से जुड़ी चीज़ों को अपना बना सकें। इन चीज़ों में ओलंपिक में भारत का सम्मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के खेल उपकरणों सहित कई प्रतिष्ठित और ऐसी कलात्मक वस्तुएं शामिल हैं जो प्रधानमंत्री को उपहार या स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की गयी हैं।

सुमित अंतिल के जेवलिन के अलावा कई ओलंपिक और पैरालंपिक विजेताओं के खेल उपकरण प्रधानमंत्री को भेट में दिये गए हैं। इनके अलावा कई समृति चिन्ह, जैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रस्तुत अयोध्या राम मंदिर की प्रतिकृति, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज द्वारा प्रस्तुत चारधाम की लकड़ी की प्रतिकृति, रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की प्रतिकृति उन वस्तुओं में शामिल है जिनकी नीलामी हो रही है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि नीलामी से हासिल होने वाली रकम देश की जीवनदायनी नदी गंगा के संरक्षण और कायाकल्प कार्यक्रम नमामि गंगे परियोजना पर खर्च की जाएगी। इस नीलामी को लेकर देश में कैसा उत्साह का माहौल बनता जा रहा है इसका अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि सुमित अंतिल के जेवलिन का बेस प्राइज़ एक करोड़ तय किया गया था पांच दिन में इसकी बोली बढ़ कर दस करोड़ रूपए हो गयी है।

इसे भी पढ़े –इस देश की संस्कृति इंसानियत और पहचान है राम-अरविन्द सिंह

 

 

Leave a Comment

+ 25 = 35