स्वामी सहजानन्द सरस्वती अपने युग के धर्म अवतार

स्वामी सहजानन्द सरस्वती अपने युग के धर्म अवतार

स्वामी सहजानन्द सरस्वती  की पुण्यतिथि पर विशेष…. “स्वामी सहजानन्द सरस्वती अपने युग-धर्म के अवतार थे| वे नि:संग थे. अपने समय के पदचाप के आकुल पहचान थे| किसान विस्फोट के प्रतीक थे. किसान आंदोलन के पर्यायवाची थे. उत्कट राष्ट्रवादी थे।पद राष्ट्रवादी वामपंथ के अग्रणी सिद्धांतकार, सूत्रकार एवं संघर्षकार थे. ये दुर्द्धर्ष व्यक्‍तित्व के धनी थे. सामाजिक न्याय के प्रथम उद्घोषक थे. संगठित किसान आंदोलन के जनक एवं संचालक थे. अथक परिश्रमी थे. तेजस्वी व्यक्‍तित्व के स्वामी…

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मधुकांत मेमोरियल फाउंडेशन का गठन

मधुकांत मेमोरियल फाउंडेशन का गठन

पटना : फादर्स डे के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार जय कृष्ण झा ने अपने पिता मधुकांत झा जी की स्मृति में उनके पहले छाया के अवसर पर “मधुकांत मेमोरियल फाउंडेशन” का गठन किया | समाजसेवी मधु कांत झा का जन्म 2 अक्टूबर को दरभंगा जिले के राघोपुर गांव में हुआ था| अभाव के बीच उन्होंने शिक्षा ग्रहण की और अपनी मेहनत, ईमानदारी तथा कार्य क्षमता के आधार पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई|  खादी आयोग एवं…

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फादर्स डे 20 june 2021

फादर्स डे 20 june 2021

फादर्स डे सबसे पहले पश्चिम वर्जीनिया के फेयरमोंट में 19 जून 1910 को मनाया गया था। कई महीने पहले 6 दिसम्बर 1907 को मोनोंगाह, पश्चिम वर्जीनिया में एक खान दुर्घटना में मारे गए 210 पिताओं के सम्मान में इस विशेष दिवस का आयोजन श्रीमती ग्रेस गोल्डन क्लेटन ने किया था। प्रथम फादर्स डे चर्च आज भी सेन्ट्रल यूनाइटेड मेथोडिस्ट चर्च के नाम से फेयरमोंट में मौजूद है। 1930 के दशक में एसोसिएटेड मेन्स वियर रिटेलर्स…

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समस्त रोगों की जड़ है रात्रि भोजन

समस्त रोगों की जड़ है रात्रि भोजन

किसी भी चिड़िया को डायबिटीज नहीं होती। किसी भी बन्दर को हार्ट अटैक नहीं आता । कोई भी जानवर न तो आयोडीन नमक खाता है और न ब्रश करता है, फिर भी किसी को थायराइड नहीं होता और न दांत खराब होता है । बन्दर शरीर संरचना में मनुष्य के सबसे नजदीक है, बस बंदर और आप में यही फर्क है कि बंदर के पूँछ है आप के नहीं है, बाकी सब कुछ समान है।…

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शंख बजाने से होने वाले लाभ

शंख बजाने से होने वाले लाभ

भारतीय परिवारों में और मंदिरो में में सुबह और शाम शंख बजाने का प्रचलन है। अगर आप रोजाना शंख बजाते है, तो इससे आपको काफी लाभ हो सकता है। इसके कुछ लाभ नीचे दिए जा रहे हैं। 1. रोजाना शंख बजाने से आप गुदाशय की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। शंख बजाना मूत्रमार्ग, मूत्राशय, निचले पेट, डायाफ्राम, छाती और गर्दन की मांसपेशियों के लिए काफी बेहतर साबित होता है। शंख बजाने से इन अंगों का व्यायाम…

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विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 05 जून को मनाया जाता है. इसके पीछे मनाने का उद्देश्य पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है. इस दिन पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए कई तरह के जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. लोगों में पेड़ों को संरक्षित करने, पेड़ पौधे लगाने, नदियों को साफ रखने, प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करने जैसे आदतों को, स्वभाव में लाने की सलाह…

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लक्ष्य निर्माण

लक्ष्य निर्माण

 यदि आप काम की तलाश में लक्ष्य विहीन होकर सड़क पर निकल पड़े हैं और इसी बीच में किसी राहगीर से पूछते हैं यह सड़क मुझे कहां ले जाएगी तो इसके उत्तर में वह आपसे पहले यह प्रश्न करेगा आपको जाना कहां है जब आप उसे कोई निश्चित स्थान बताएंगे तभी वह आपका सही मार्गदर्शन कर सकेगा अन्यथा आप एक लक्ष्य विहीन की तरह इधर-उधर घूमते रहेंगे आसपास है बिना लक्ष्य तय किए किसी कार्य…

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जीवन का मूल्य क्या है

जीवन का मूल्य क्या है

जीवन का मूल्य क्या है यह हमें आध्यात्मिक चेतना बताती है आध्यात्मिक चिंतन से हमारी नैतिकता और चरित्रता का निरंतर विकास होता है जो किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए विशेष गुण माने जाते हैं अतः जरूरी है कि आप आध्यात्मिक को भी अपने जीवन का अंग माने जिससे आप आत्म स्तर पर भी उन्नति करते रहे, ऐसा करने से आपकी मानसिकता में जीवन के प्रति अनुकूलता बनी रहेगी और फिर आप सकारात्मक…

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“तमसो मा ज्योतिर्गमय”

“तमसो मा ज्योतिर्गमय”

“तमसो मा ज्योतिर्गमय” हे सूर्य! हमें भी अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो… हिंदू धर्म ने माह को दो भागों में बाँटा है- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष. इसी तरह वर्ष को भी दो भागों में बाँट रखा है. पहला उत्तरायण और दूसरा दक्षिणायन. उक्त दो अयन को मिलाकर एक वर्ष होता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करने की दिशा बदलते हुए थोड़ा उत्तर की ओर ढलता जाता है, इसलिए…

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संगठन का महत्व

संगठन का महत्व

एक व्यक्ति था, जो हमेशा अपने संगठन में सक्रिय रहता था . उसको सभी जानते थे , बड़ा मान सम्मान मिलता था. सबके जीवन में सुख दुख का फेरा तो चलता ही रहता है . इसी तारतम्य में एक दिन अचानक किसी सामाजिक दुख प्राप्ति के कारण उसका मन संसार से उचाट हो गया. वह निश्क्रिय रहने लगा , मिलना – जुलना बंद कर दिया , और संगठन से दूर हो गया। कुछ सप्ताह पश्चात्…

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