ललन सिंह ने इस्तीफे की खबर का किया खंडन, कहा-ऐसी कोई बात नहीं

Jdu के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के इस्तीफे की खबर आज सुबह ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थी। लेकिन इस खबर का खंडन खुद ललन सिंह ने किया है। उन्होंने इसे बेबुनियाद बताया। ललन सिंह ने कहा कि मैंने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से इस्तीफा नहीं दिया है। लेकिन पता नहीं क्यों इस तरह की चर्चा हो रही है।
उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के इस्तीफे की खबरों से सियासी हलचल तेज हो गई है। मीडिया में ललन सिंह के इस्तीफे को सुनकर नीतीश के करीबी मंत्री विजय चौधरी भागे भागे जेडीयू दफ्तर पहुंचे और सभी अटकलों को खारिज कर दिया। विजय चौधरी ने ललन सिंह के इस्तीफे की खबर को पूरी तरह से गलत बताया है।

दरअसल, बिहार की सियासत में पिछले कई दिनों से इस बात की चर्चा हो रही है कि ललन सिंह को जेडीयू के अध्यक्ष पद से हटाया जा सकता है। कहा जा रहा था कि 29 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार इसको लेकर निर्णय हो सकते हैं। ललन सिंह के ऊपर लालू के साथ मिलकर जेडीयू को तोड़ने के आरोप लग रहे थे।


इसी बीच बिहार की मीडिया में खबर आई कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले ही ललन सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। ललन सिंह के इस्तीफा देने की चर्चा तेज हुई तो नीतीश के करीबी मंत्री विजय कुमार चौधरी अचानक जेडीयू दफ्तर पहुंच गये और ललन सिंह के इस्तीफे की बात को पूरी तरह से गलत बताया। उन्होंने कहा कि मीडिया में कुछ ऐसे लोग हैं जो इस तरह का अफवाह उड़ाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ललन सिंह ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है।

विजय चौधरी ने कहा कि ना हमलोगों को, ना ही पार्टी कार्यालय को इस तरह की कोई सूचना है। पार्टी ऑफिस में इस तरह की कोई चर्चा नही है। 29 दिसंबर को ना सिर्फ कार्यकारिणी की जबकि परिषद की भी बैठक होने जा रही है। इस बैठक का आयोजन पिछले काफी समय से लंबित था इसलिए आयोजन किया जा रहा है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर बैठक लाजमी है। एंडी गठबंधन में कई दल हैं तो सीट बंटवारे को लेकर बात होगी।

ललन सिंह के इस्तीफा वाली खबर पर उन्होंने कहा कि आप लोग ही खबर चलाते हैं और खबर को मार देते हैं। इस तरह की बात पार्टी या पार्टी कार्यालय तक नहीं पहुंची है। सुशील मोदी जदयू की बात इसलिए करते हैं क्योंकि उनको अपने दल में कोई नहीं पूछता है। जब अपने दल के लोग नहीं पूछते हैं तो लोग इधर-उधर भटकते रहते हैं।

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