विश्व ओजोन दिवस

विश्व ओजोन दिवस पहली बार साल 1995 में मनाया गया था, इस साल आयोजित होने वाली विश्व ओजोन दिवस की थीम है जीवन के लिए ओजोन, इस साल हम वैश्विक ओजोन परत के 35 साल मना रहे हैं , ओजोन दिवस हर साल 16 सितंबर को मनाया जाता है । ओजोन परत क्यों हमारे लिए महत्वपूर्ण है ? ओजोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जिसमें ओजोन गैस की सघनता अपेक्षाकृत अधिक होती है ओजोन परत के कारण ही धरती पर जीवन संभव है । यह परत सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैगनी प्रकाश की 90 से 99% मात्रा अवशोषित कर लेती है , जो पृथ्वी पर जीवन के लिए हानिकारक है । ओजोन परत पृथ्वी के समताप मंडल के निचले भाग में पृथ्वी की सतह के ऊपर लगभग 10 किलोमीटर से 50 किलोमीटर की दूरी तक पाई जाती है । ओजोन परत के क्षरण से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण संक्रमण बीमारियों में बढ़ोतरी त्वचा कैंसर आंखों के रोग बी विकिरणों से पेड़ पौधे की जैविक प्रक्रिया पर दुष्प्रभाव पड़ता है । हाल ही में गैर सरकारी संस्था विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार देश की राजधानी दिल्ली के वातावरण में बीते साल भर में ओजोन के प्रदूषण कणों की मात्रा डेढ़ गुना तक बढ़ गई है , आज हमारी लापरवाहीओ और बढ़ते औद्योगिकरण के साथ ही गाड़ियों और कारखानों से निकलने वाली खतरनाक गैसों के कारण ओजोन परत को भारी नुकसान हो रहा है और इसकी वजह से ओजोन प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। ओजोन परत में होने वाले छरण का कारण मनुष्य खुद है वैज्ञानिकों की माने तो 8 घंटे के औसत में ओजोन प्रदूषक की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए ओजोन परत के छय की जानकारी सर्वप्रथम वर्ष 1960 में मिली थी वर्ष 1985 में वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगाया की अंटार्कटिका महादेव के ऊपर ओजोन परत में एक बड़ा छेद हो गया है , और यह लगातार बढ़ रहा है अंटार्कटिका के अलावा कई देशों से ऊपर भी वायुमंडल में ओजोन परत में छिद़ देखे गए हैं इसी ओजोन परत के छरण की समस्या पर विश्व का ध्यान आकर्षित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र में 16 दिसंबर का दिन विश्व ओजोन दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया,

क्या आप जानते हैं ? की धरती पर जीव जंतुओं और पौधों को जीवित रहने के लिए न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है । अब इससे बचने का समाधान जानते हैं, ओजोन परत के छरण को रोकने के लिए सरकार एजेंसियों, एनजीओ इत्यादि के द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं तो क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि हम इसमें सरकार की कुछ मदद करें जनता और सरकार के संयुक्त प्रयासों से ही इसे रोका जा सकता है । सभी लोगों को पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करना होगा जिससे हानिकारक गैसों की मात्रा कम हो , अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना होगा , ऐसी सभी चीजों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जिससे ओजोन परत कमजोर हो जल और वायु प्रदूषण को कम करने के उपाय अपनाने चाहिए , फ्रिज , एयर कंडीशनर इत्यादि मशीनों का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए । इन सब छोटी-छोटी चीजों से हम खुद को और हमारी पृथ्वी को बहुत बड़े संकट से बचा सकते हैं।

Thanks To : Ranjana

इसे भी पढ़े –मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भारत ने एक बार फिर आवाज उठाई

Leave a Comment

4 + 6 =