कौन से ऋषि का क्या है महत्व-

कौन से ऋषि का क्या है महत्व-

महत्वपूर्ण जानकारी अंगिरा ऋषि? ऋग्वेद के प्रसिद्ध ऋषि अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र थे। उनके पुत्र बृहस्पति देवताओं के गुरु थे। ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि अंगिरा ने सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न की थी। विश्वामित्र ऋषि? गायत्री मंत्र का ज्ञान देने वाले विश्वामित्र वेदमंत्रों के सर्वप्रथम द्रष्टा माने जाते हैं। आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत इनके पुत्र थे। विश्वामित्र की परंपरा पर चलने वाले ऋषियों ने उनके नाम को धारण किया। यह परंपरा अन्य ऋषियों के साथ भी चलती रही। वशिष्ठ…

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मलमास (पुरुषोत्तम मास) 2018

मलमास (पुरुषोत्तम मास) 2018

इस वर्ष का मलमास 16 मई 2018 से 13 जून 2018 तक रहेगा । हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिकमास, मल मास या पुरूषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवद् भक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है। ऐसा माना…

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शनि जयंति के उपलक्ष्य में

शनि जयंति के उपलक्ष्य में

शनि जयंति के उपलक्ष्य में आप सभी को हार्दिक शुभकामना। शनिदेव की कृपा आप सभी पर बनी रहे। ?दशरथ कृत शनि स्तोत्र? नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।१।। नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च । नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।२।। नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:। नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।३।। नमस्ते कोटरक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम: । नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।४।। नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते। सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च ।।५।। अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु…

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राम से परशुराम

राम से परशुराम

‘परशु’ प्रतीक है पराक्रम का। ‘राम’ पर्याय है सत्य सनातन का। इस प्रकार परशुराम का अर्थ हुआ पराक्रम के कारक और सत्य के धारक। शास्त्रोक्त मान्यता तो यह है कि परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, अतः उनमें आपादमस्तक विष्णु ही प्रतिबिंबित होते हैं, परंतु मेरी मौलिक और विनम्र व्याख्या यह है कि ‘परशु’ में भगवान शिव समाहित हैं और ‘राम’ में भगवान विष्णु। इसलिए परशुराम अवतार भले ही विष्णु के हों, किंतु व्यवहार…

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सूतक

सूतक

सूतक-हमारे ऊपर आ रहे कष्टो का एक कारण सूतक के नियमो का पालन नहीं करना भी हो सकता है। सूतक का सम्बन्ध “जन्म एवं मृत्यु के” निम्मित से हुई अशुद्धि से है ! जन्म के अवसर पर जो “”नाल काटा”” जाता है और जन्म होने की प्रक्रिया में अन्य प्रकार की जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष/पाप के प्रायश्चित स्वरुप “सूतक” माना जाता है !जन्म के बाद नवजात की पीढ़ियों को हुई अशुचिता…

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वैदिक उपदेश

वैदिक उपदेश

आइए आज के वैदिकोपदेशशृंखला में हम कर्म और कर्मफल विषय पर कुछ चिन्तन करें ।कर्मों का फल कब, कैसा, कितना मिलता है, यह जिज्ञासा सभी धार्मिक व्यक्तियों के मन में होती है। कर्मफल देने का कार्य मुख्य रूप से ईश्वर द्वारा संचालित और नियन्त्रित है।वही इसके पूरे विधान को जानता है। मनुष्य इस विधान को कम अंशों में और मोटे तौर पर ही जान पाया है क्योंकि उसका सामर्थ्य ही इतना है। ऋषियों ने अपने…

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सिर्फ गया में हीं नहीं देश के इन जगहों पर भी पितरों का किया जाता है पिंडदान

सिर्फ गया में हीं नहीं देश के इन जगहों पर भी पितरों का किया जाता है पिंडदान

वैसे तो बिहार के शहर गया में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का पिंडदान करने का सबसे उपयुक्‍त स्‍थान माना गया है। भारतीय मान्‍यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म करना अत्‍यंत पवित्र कर्म है। पितृपक्ष में मृत माता-पिता का उनकी संतान द्वारा श्राद्ध किया जाता है, परंतु गया में श्राद्ध का विशेष महत्व है। वैसे तो श्राद्ध शास्त्रीय समय निश्चित है, परंतु ‘गया सर्वकालेषु पिण्डं दधाद्विपक्षणं’ कहकर वहां हमेशा पिंडदान करने की अनुमति दी गई है।…

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अगर आपने घर में रखा है गंगाजल तो भूलकर भी न करें यह काम

अगर आपने घर में रखा है गंगाजल तो भूलकर भी न करें यह काम

हिंदू धर्म में गंगा नदी को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए भक्‍त पवित्र गंगाजल को अपने घर में रखते हैं। अनेक धार्मिक अनुष्‍ठानों में भी इसका प्रयोग होता है।अगर आपने भी अपने घर में रखा है गंगाजल तो इन बातों को अवश्‍य ध्यान में रखें कि जिस कमरे में आप गंगाजल रखें उस कमरे में भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।ऐसा करने से गृहदोष लगता है। गंगाजल को कभी भी…

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जानिए बंदर वाले मंदिर ओर इसकी मान्यता के बारे में

जानिए बंदर वाले मंदिर ओर इसकी मान्यता के बारे में

जयपुर भारत के सबसे सुंदर शहरों में से एक है। पिंक सिटी के नाम से जाना जाने वाला यह शहर अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं बल्कि यहां के मंदिरों के लिए भी मशहूर है। धर्म अध्यात्म के अनुसार यहां का प्रसिद्ध मंदिर गलताजी मंदिर और कुण्ड भी धार्मिक मान्यताओं से भरा है।जयपुर से लगभग 10 कि.मी. दूरी पर अरावली पहाड़ियों में गलता नाम का मंदिर और कुंड है। यह जगह सात कुण्डों और अनेक…

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जानिए इस मंदिर के बारे में अक्षय तृतिया के दिन खुलता है पट

जानिए इस मंदिर के बारे में अक्षय तृतिया के दिन खुलता है पट

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में हैं एक ऐसा मंदिर जो अक्षय तृतीया के दिन खुलता है. यह मंदिर दीवाली के बाद बंद कर दिया जाता है.यह मंदिर काफी प्राचीन है. इसलिए प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त हो गया था. इसलिए मंदिर का पुर्ननिर्माण 19वीं शताब्दी में किया गया था.यह मंदिर देश की दूसरी सबसे पवित्र नदी को समर्पित है. जहां काले संगमरमर से बनी मां यमुना की प्रतिमा है. यह प्रतिमा काफी प्राचीन है. मंदिर यमुना…

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